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Friday, May 15, 2015

आज की बेटी






बेटी जनमी
घटा जीवन तम
लाई खुशियाँ
ज़िंदगी गाने लगी
रोशनी छाने लगी !

कथा पुरानी
आँचल में है दूध
आँखों में पानी !

सिंधु सा मन
पर्वत सा हौसला
फूल सा तन !

बाँध लिया है
मुठ्ठी में आसमान
सारा जहान !

शिक्षित कन्या
प्रतिभाशाली बेटी
सुयोग्य बहू !

आज की बेटी
प्रवाहमान नदी
चंचल हवा    
है शीतल चन्द्रमा
तो प्रखर सूर्य भी !

मरोड़ती है
रूढ़ियों की उँगली
आज की बेटी !

उन्नति पथ
तोड़ती वर्जनायें
बढ़ती बेटी !

गढ़ती तन
शुद्ध करती आत्मा
देती संस्कार !

घर की शान
परिवार का मान
शिक्षित बेटी !

एक छलाँग
और नाप लिये हैं
सातों गगन
बाँधने को बाहों में
चाँद और सूरज !

साधना वैद



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